Wednesday, September 20, 2023


अब थक गया हूँ


ऐ जिंदगी, अब थक गया हूँ।

थोड़ा आराम करने दे।


जीने की कोई ख्वाहिश ना रही अब,

कत्लेआम करने दे।


ऐ जिंदगी, अब थक गया हूँ।

थोड़ा आराम करने दे।


चलना ही था मुकद्दर, चलते गए हम

मिलकर बिछड़ना था, बिछड़ गए हम।


बहुत हुआ मुश्किलों का दौर

अब मुश्किलों शाम ढलने दे।


ऐ जिंदगी, अब थक गया हूँ।

थोड़ा आराम करने दे।


गम तो नही है, मंजिल खो जाने का।

कोई शिकवा नही है, उसके छोड़ जाने का।


हमे कब मिला है, चैन यहां।

आज जी भर कर रो लेने दे।


ऐ जिंदगी, अब थक गया हूँ।

थोड़ा आराम करने दे।


यहां सबकुछ है दूसरों का,

हर चीज है पराई।

सांसों का ये बंधन,

हर धड़कन है पराई।


उम्र भर हूँ जगा, ऐ जिंदगी।

आखिरी बार सोने दे।


ऐ जिंदगी, अब थक गया हूँ।

थोड़ा आराम करने दे।

No comments:

Post a Comment