हर शख्स तन्हा
यहां हर शख्स तन्हा, अकेला है।
कभी ख़ुशी से लिपटा हुआ,
तो कभी ग़मों ने उसे घेरा है।
यहां हर शख्स तन्हा, अकेला हैं।
कभी उलझा हुआ खुद में,
कभी दुनिया का झमेला है।
यहां हर शख्स तन्हा, अकेला है।
मिलती नही किसी को चैन यहां,
कभी परेशां तो कभी थकेला है।
यहां हर शख्स तन्हा, अकेला है।
जाना था, उसे लंबी रेस में, पर
कभी थक गया, मंजिल से पहले,
और कभी अपनों ने रास्ते से धकेला है।
यहां हर शख्स तन्हा, अकेला है।
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